सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितम्बर 2025 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अब सभी शिक्षकों की पदोन्नति के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा। यह नियम अल्पसंख्यक और गैर-अल्पसंख्यक दोनों संस्थानों पर लागू होगा।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितम्बर 2025 को एक अहम आदेश पारित किया, जिसने शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। अब से शिक्षक पदोन्नति के लिए TET (Teacher Eligibility Test) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लंबे समय से चल रहे विवादों को समाप्त करता है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
विवाद महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों से शुरू हुआ, जहाँ विभिन्न उच्च न्यायालयों ने अलग-अलग निर्णय दिए थे।
सवाल यह था कि क्या TET केवल नई नियुक्तियों के लिए जरूरी है या पहले से कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति में भी इसकी आवश्यकता होगी।
कई शिक्षक संघ और अल्पसंख्यक संस्थान इसके खिलाफ थे, जबकि राज्य सरकारें और शिक्षा विभाग TET को अनिवार्य मानते रहे।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
- सभी शिक्षकों के लिए समान नियम
न्यायालय ने कहा कि चाहे शिक्षक अल्पसंख्यक संस्थान में हों या गैर-अल्पसंख्यक, पदोन्नति के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा। - अनुभव से छूट नहीं
केवल 20–25 साल का अनुभव होने पर किसी शिक्षक को पदोन्नति नहीं मिलेगी, जब तक कि उसने TET पास न किया हो। - गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर
अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21(A) के अंतर्गत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार है, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हर पदोन्नति योग्य शिक्षकों को ही मिले।
फैसले के प्रभाव
हजारों शिक्षकों पर असर: अब वे शिक्षक जो वर्षों से TET पास नहीं कर पाए हैं, पदोन्नति से वंचित हो सकते हैं।
राज्यों की जिम्मेदारी: सभी राज्य सरकारों को पदोन्नति प्रक्रिया में संशोधन करना होगा।
अल्पसंख्यक संस्थानों में बदलाव: पहले जिन संस्थानों को RTE से कुछ छूट मिली थी, अब वहाँ भी TET लागू होगा।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने वाला है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने वाला भी है। अब किसी भी संस्थान में पदोन्नति सिर्फ उन्हीं शिक्षकों को मिलेगी जो TET पास हैं। यह निर्णय आने वाले वर्षों में भारत की शिक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाएगा।
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